अपने आप को पहचानो

 एक समय की बात है। एक छोटे से गांव में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था। पिता बीमार थे और माता जी सुसहारे का काम करके परिवार की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करती थीं। इस परिवार में एक छोटी सी बेटी भी थी जो बहुत अच्छी छात्रा थी।

एक दिन, वह छोटी सी बेटी एक गांव के पंडित जी के पास गई और कहा, "पंडित जी, मेरे पास बहुत कम समय है, लेकिन मैंने सुना है कि आपके पास एक ऐसी कहानी है जो मेरे जीवन को बदल सकती है। कृपया मुझे उसे सुनाएं।"

पंडित जी ने बेटी की बात सुनी और मुस्कराते हुए बोले, "बेटी, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाऊंगा। एक समय की बात है, एक साधू जी अपने यात्रा में एक गांव आए। उन्होंने गांव के लोगों से अनेक प्रश्न पूछे। एक बालक ने उनसे पूछा, 'स्वामी जी, मेरे पास बहुत कम समय है, लेकिन मैं ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूँ। क्या मेरे लिए कुछ है?' साधू जी ने बालक को एक आइना दिया और कहा, 'जब तुम इस आइने में देखोगे, तो तुम्हें अपनी असली सत्यता और पोषण की ओर ध्यान देना चाहिए, न कि तुम्हारे असली स्वरूप को तथाकथित दिखने वाले चीजों को।'

बेटी ने इस कहानी को सुनकर समझा कि हमें अपनी असली पहचान पर ध्यान देना चाहिए और अपनी क्षमताओं और प्रतिभाओं का सही उपयोग करना चाहिए। उसने गांव के बच्चों को अध्यापिकाओं की मदद करने का निर्णय लिया और उन्हें अपनी पढ़ाई में मदद करना शुरू कर दिया।

वक्त बितते-बितते उस बेटी ने खुद को साकारताओं से मुक्त कर दिया और अपनी सपनों को साकारता में परिवर्तित कर दिया। उसकी मेहनत और परिश्रम से वह एक अच्छी शिक्षक बन गई और गरीबी को पार करके उसने अपने परिवार को समृद्धि दिलाई।

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमारे पास उपाय हमेशा मौजूद होते हैं, हमें अपनी क्षमताओ

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